राजधानी में बेटी सुरक्षित न हो तो आगे क्या बात हो सकती है..!
अब तो ऐसा कानून बने जिसमे की एक धर्म में मानने वाला यदि दूसरे धर्म विशेष व्यक्ति के साथ कोई भी मामूली या संगीन जुर्म करें, मारे पीटे, खून करें तो उसकी विशेष सजा का प्रावधान होना चाहिए, फास्ट ट्रैक न्याय होते हुए और जैसे की दहेज विरोधी कानून हुआ करता था वैसे ऐसे केस में कुसूरवार के मां बाप या परिवार के दोषी सदस्य की भी जांच होनी चाहिए. दहेज प्रकरण में कैसे होती थी वैसे परिवार के अन्य सदस्य भी को भी दस साल की सजा लगनी चाहिए…!

बेटी साक्षी की श्रद्धांजली यात्रा दिल्ली में ही नहीं देशभर में निकाल नी चाहिए…!

विशिष्ट कानून की मांग करते हुए इस्की पत्रिकाये बांटते हुए संसद तक ऐसी श्रद्धांजलि यात्रा पहुंचनी चाहिए

में लीगल एक्सपर्ट नहीं पर मेरे कहने का मतलब आप समझ गए हो तो इस मेसेज को आगे जरुर बढ़ाए ..!

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