विश्व पृथ्वी दिवस

दुनिया के 192 देशों के लोग अर्थ डे मनाते है । लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए 1970 से 22 अप्रैल को ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। सर्वप्रथम “सीनेटर गेराल्ड नेल्सन” के नेतृत्व में अमेरिका के राज्यों में ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाया गया था।
1990 तक 141 देश आंदोलन में शामिल हो चुके थे और वर्तमान में 192 से अधिक देश शामिल हो चुके हैं। भारत सहित दुनिया भर के विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा पृथ्वी दिवस मनाया जाता रहा है, इस दौरान पर्यावरण की रक्षा और पोषण का संकल्प लिया गया। पृथ्वी और उसके पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए मनुष्य जिम्मेदार है। सबसे बड़ा खतरा पॉलीथिन के प्रयोग को लेकर है। हर भारतीय हर साल आधा किलो पॉलीथिन जमा कर रहा है। इससे पृथ्वी पर अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

🚫⚠️ परिणाम स्वरूप ⚠️🚫

  • उत्तर ध्रुवीय बर्फ की टोपी का पिघलना।
  • ओजोन परत में छेद वजह से सूर्य की पराबैंगनी किरणों को रोकता है।
  • भयानक तूफान, सुनामी, बेमौसम बारिश।
  • ग्लोबल वॉर्मिंग ने पिछले एक साल में धरती के तापमान में 0.36 डिग्री की बढ़ोतरी की है।
  • 21वीं सदी में यह 2.1 – 9.4 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ जाएगा।
  • इंसानों में चर्म रोग और कैंसर की बीमारी बढ़ेगी।
  • समुद्र का स्तर बढ़ेगा और तटीय क्षेत्र जलमग्न हो जाएंगे।

🔴 इन कारणों से नष्ट हो रही है हमारी माँ धरती 🔴

  • हम जगह-जगह कूड़ा करकट डालते हैं
  • बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और शहरीकरण से उत्पन्न ठोस अपशिष्ट, सभी प्रकार के प्रदुषण होते है।
  • पॉलिथीन (प्लास्टिक) पृथ्वी की अखंडता और जल संसाधनों को नुकसान पहुँचाता है। प्लास्टिक के धुएं से ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचता है।
  • पॉलीथिन के कारण लाखों पशुओं की मौत हो जाती है।
  • पॉलिथीन के कचरे के दहन से सांस और चर्म रोग होते हैं।
  • पॉलीथिन से नालियां जाम हो जाती हैं। यह सड़कों पर गंदगी भी फैलाता है और मच्छरों को जन्म देता है और हैजा, टाइफाइड, डायरिया और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों का कारण बनता है।
  • भारत में हर साल करीब 500 मेट्रिक टन पॉलिथीन का उत्पादन होता है लेकिन इसका एक प्रतिशत से भी कम रिसाइकिल किया जा सकता है।
  • पॉलीथिन खाने से दर्जनों पशुओं की मौत हो जाती है।

पृथ्वी दिवस भारत सहित दुनिया भर के विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा मनाया जाता है, जिसके दौरान पर्यावरण की रक्षा और पोषण का संकल्प लिया जाता है। तो आप भी कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखकर इस अभियान में हिस्सा ले सकते हैं।

🌏 पृथ्वी को बचाने चलो हम कुछ कोशिश करे 🌏
🍛 भोजन की बर्बादी रोकें:
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर साल कुल खाद्य उत्पादन का लगभग एक तिहाई (लगभग 1.3 अरब टन) बर्बाद हो जाता है। शादियों में खाने की बर्बादी को रोक कर हम मदद कर सकते हैं।
🍄 भूमि की उर्वरता बढ़ाएँ:
पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों की खेती करके मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना, ताकि धरती की अनाज उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।
🍃 जैविक खेती:
घातक रसायनों और कीटनाशकों का उपयोग करने के बजाय, जैविक खेती खाद्य उत्पादों के पोषण मूल्य को बनाए रखेगी। यह औसत जीवन प्रत्याशा में भी वृद्धि करेगा। तो आइए जैविक चीजों को महत्व दें।
🌻किचन गार्डन:
शहर में गार्डन फार्मिंग जैसे नए आइडिया आजमाए जा सकते हैं। जो लोग अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, उनके लिए एक किचन गार्डन काम आएगा। क्या आप जानते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा भी व्हाइट हाउस में किचन गार्डनिंग करती हैं।
🌧 वर्षा जल संचयन:
वर्षा जल का संचय करना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
🌱 पौधा लगाइए:
घर में फर्नीचर, टेबल, अलमारी जैसी लकड़ी की वस्तुएं दैनिक जीवन में अपरिहार्य हो गई हैं, लेकिन इसके नुकसान की भरपाई हम अधिक से अधिक पेड़ लगाकर कर सकते हैं। घर, स्कूल, ऑफिस के आसपास ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। यह कार्बन प्रदूषण को कम करने में कारगर होगा।

हम सब ऐसे घरतीमाता की मदद कर सकते हैं
♻️ इको फ्रेन्डली:
पर्यावरण के अनूकूल, बायोडीग्रेडेबल, रीसाइकल, प्राकृतिक, वेस्ट मे से बेस्ट बननेवाली वस्तुओं का उपयोग करे।
🐚 कम खरीदारी:
केवल जरूरी चीजें ही खरीदें। जंक सामान खरीदना पर्यावरण के साथ-साथ जेब के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
📝 दान देना:
हम अपनी किसी भी बेकार वस्तु को फेंकने की जगह दान कर सकते हैं। जैसे पुराने कपड़े, खिलौने, जूते किसी और को देकर मदद की जा सकती है।
🌱 पौधे उगाएं:
आंध्र प्रदेश के किसानों ने खेतों में घास और हरी सब्जियां उगाई हैं। इससे चारे की कमी नहीं होगी और पशु अधिक दूध देंगे। यह खेतों को समृद्ध भी कर सकता है।
🚌 सार्वजनिक परिवहन का उपयोग:
स्कूटर-कार की जगह सिटी बस, बीआरटीएस जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ईंधन की बचत के साथ ही प्रदूषण में भी कमी आएगी।
♻ कचरे को कम करें:
पुनर्नवीनीकरण उत्पादों का उपयोग पृथ्वी पर कचरे की मात्रा को कम कर सकता है। ऐसे उत्पादों का उपयोग न करें जिन्हें पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है।
💡बिजली की बचत:
उच्च ऊर्जा खपत वाले उपकरणों के अनावश्यक उपयोग से बचें। इससे ऊर्जा की बचत होगी।

आइए हम सब मिलकर धरती माता को प्रदूषण मुक्त बनाएं, पर्यावरण की रक्षा, जतन करें और सभी जीवो के लिए बेहतर एवं सुनहरा भविष्य जीवन दिलाए…

चिंतन त्रिवेदी – प्रकृति प्रेमी सेवक

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,
पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

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