अरब में तो अब भी इसे नवाबी शौंक के रूप में जाना जाता है और भारत से जाने वाले जालीदार कटोरी वाले लोग वहां से काफी दिरहम और दीनार कमाकर लाते हैं।

गोला बनाओ गोला।
इस्लामिक मुगलिया शासन व “ऑटोमन एम्पायर (अर्तग्रुल गाजी)” में होमोसेक्सुएलिटी…

परमेश्वर ने स्त्री पुरुष की संरचना की जिससे हम सभी मनुष्यों का क्रम सुचारू चलता रहे। अधिकांश धर्म समलैंगिकता का विरोध ही करते हैं लेकिन यह एक बहुत कडवा सच है कि थर्ड जेंडर अधिकतर एक जालीदार समाज में ही पैदा होता है इसकी सबसे बडी वजह है उनका हरम वाला इतिहास और गिलमों की जन्नत वाला भविष्य। जबकि इनके नेता सबकी मर्दानगी का सर्टिफिकेट मांगते फिरते हैं।

आजकल सभी मुस्लिम ऑटोमन साम्राज्य की कहानियाँ गा रहे हैं, पहले जान लेते हैं कि यह था क्या?
पश्चिम अनातोलिया में अर्तग्रुल एक तुर्क प्रधान था। एक समय जब वो एशिया माइनर की तरफ़ कूच कर रहा था तो उसने अपनी चार सौ घुड़सवारों की सेना को भाग्य की कसौटी पर आजमाया।
उसने हारते हुए पक्ष का साथ दिया और युद्ध जीत लिया। उन्होंने जिनका साथ दिया वे सेल्जक थे। सेल्जक प्रधान ने अर्तग्रुल को उपहार स्वरूप एक छोटा-सा प्रदेश दिया। आर्तग्रुल के पुत्र उस्मान ने 1289 में अपने पिता की मृत्यु के पश्चात प्रधान का पद हासिल किया। उसने 1299 में अपने आपको स्वतंत्र घोषित कर दिया। यहीं से उस्मानी साम्राज्य की स्थापना हुई जिसका आधार था इस्लामिक शरिया कानून। इसके बाद जो साम्राज्य उसने स्थापित किया उसे उसी के नाम पर उस्मानी साम्राज्य कहा जाता है (इसी को अंग्रेजी में ऑटोमन एम्पायर भी कहा जाता है)।
इसकी मनघडंत कहानियाँ तुर्की टीवी पर चल रही हैं लेकिन जिस समलैंगिकता का विरोध इस्लाम करता है वो ना केवल जन्नत का सच है, आज की हकीकत है बल्कि इनका इतिहास भी इन सबसे भरा पडा है।
ऑटोमन साम्राज्य में अधिकांश सैनिक युद्ध में एक दूसरे के साथ गोला बनाते थे। सबसे अगला व्यक्ति सबसे पिछले व्यक्ति के पीछे घूमकर आता था और इसतरह सामूहिक समलैंगिकता का कार्यक्रम चलता था जिसमें राजा, सेनापति व सैनिक सब शामिल होते थे।
यही नहीं तथाकथित महान मुगल शासक अपने हरम में सैकड़ों लौंडे रखते थे जिनसे उनकी समलैंगिकता जगजाहिर थी। अधिकतर मुस्लिम शासक बहुत शौकीन होते थे जिसके लिए वो अच्छे पहलवान मुस्टंडे जवान लडके रखते थे, जो इनकी गेंद फाडके रखते थे। अलाउद्दीन खिलजी और मलिक काफूर का रिश्ता दुनिया जानती है।
आज भी थोडे से बडे होते ही भाईजान भाईजान करके आपस में बहुत प्यार बांटा जाता है।

चोरी छिपे मेरी पोस्ट पढने वाले जालीदार हरे टिड्ढों को अपनी कहानी याद आ रही है और वो मंद मुस्कुरा रहे हैं…

अरब में तो अब भी इसे नवाबी शौंक के रूप में जाना जाता है और भारत से जाने वाले जालीदार कटोरी वाले लोग वहां से काफी दिरहम और दीनार कमाकर लाते हैं।
सोचने वाली बात यह है कि इस्लाम में समलैंगिकता का विरोध केवल एक पाखंड मात्र है। क्योंकि इनकी किताबें स्वयं जन्नत में हूरों के साथ समलैंगिक गिलमें परोसने का वादा करती हैं।

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