बिना छत के बनाया गया विश्व का एकमात्र शिवालय
वलसाड अब्रामा

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मित्रों इस शिवालय के विशेषता यह है की इसके उपर छत नहीं है और मैं समजता हूँ की यह विश्व का पहला ऐसा शिवालय होगा की जो ऊपर से खुला हो, जिसके ऊपर छत ही न हो …. और जिसे ऐसे ही बनाया गया हो ….
इसके पीछे की कहानी ज्यादा पुरानी नहीं है आज से कुछ ही दशकों पहले की है .. यह शिवलिंग पहले आसपास में किसी जगह पर था पर जब इस शिवलिंग को कुछ लोगों द्वारा अपनी मौजूदा जगह से हटाने का प्रयत्न किया गया, जैसे ही इसे हटाने का प्रयत्न किया तो इस शिवलिंग के नीचे से बहुत सारे भवरे ऊपर उड़े…. इस तरह की घटना को एक असाधारण घटना माना जाता है और जब इस घटना की खबर फैलते हुए वलसाड के शिवभक्तों तक पहुंची तो वह आश्चर्यककित रह गए और इस पर बहुत विचार मंथन किया.. .. उन्ही दिनों दौरान एक शिवभक्त को स्वप्न में प्रेरणा हुई इस शिवलिंग को अपनी मौजूदा जगह से दूर ले जाने की …. जब उस शिवभक्त ने औरों को इसके बारे में बताया तो उसके बाद कुछ शिवभक्त मिलकर उस जगह पर पहुचे और सबने मिलकर यह शिवलिंग को उठाया किसी और स्थल पर ले जाने उद्देश्य से.. जब इसे उठाया गया था तब यह शिवलिंग बिल्कुल हल्का फुल्का सा लग रहा था परंतु, जैसे ही उस शिवलिंग को अपनी मौजूदा जगह से थोड़े ही दूर ले जाया गया तो यह शिवलिंग इतना भारी हो गया की इसे एक कदम भी और आगे ले जाना असंभव था तो सभी शिवभक्तों ने मिलकर इस शिवलिंग को वही पर ही नीचे जमीन पर रख दिया.. कई दिनों बाद शिवभक्तों ने मिलकर यह निर्णय लिया और शिवालय उस नई जगह पर शिवालय बनाया गया और तब से आज तक महादेव वही पर विराजमान है….
अब इसके पहले आप यह सोचना शुरू करें की इस घटना का शिवालय की छत से क्या संबंध है तो इसके पहले मैं आपको शिवालय के छत के बारे में बताना चाहता हूँ मित्रों…. वास्तविकता यह है की इस शिवालय के ऊपर की छत बनाने का काम कभी भी पूर्ण नहीं हो पाया.. या तो इस शिवालय के ऊपर छपरा या पत्रा रखा गया तो वह कुछ ही हपतों में तेज हवा से उड़ जाया करता था…. यदि इसके ऊपर स्लैब बनाने का निर्णय लिया गया तो काम शुरू नहीं हो पाता और यदि शुरू हुआ तो पूर्ण नहीं हो पाता था.. कई बार ऐसा भी हुआ की स्लैब बनने के कुछ ही महीनों के अंदर स्लैब गीर जाता था और ऐसा कई बार होने पर सभी शिवभक्तों ने मिलकर इस शिवालय को ऊपर से खुला रखने का निर्णय लिया और इस कारण यह शिवालय को “तड़केश्वर” नाम दिया गया क्योंकि गुजराती में तड़का यानि धूप…. महादेव को यहाँ ऐसे ही रहना पसंद है मित्रों….
वलसाड स्थित यह तड़केश्वर शिवालय और नैशनल हाइवे के आसपास में देखने लायक स्थल है पार्नेरा पर्वत, तिथल समुद्र तट जहां पर है स्वामीनारायण मंदिर और साईबाबा मंदिर
नैशनल हाइवे के धरमपुर चार रस्ते के एक और वलसाड शहर बसा हुआ है और हाइवै की दूसरी और धरमपुर – त्रयंबकेश्वर नाशिक और शिर्डी जाने के लिए यही रास्ता आगे चलता है…. धरमपुर में ट्रेकिंग के लिए विल्सन हिल्स और शंकर वाटर्फ़ाल्स, पास ही में है बिलपुड़ी जहां पर मावली वाटर फाल्स और बारूमाल, यहाँ पर श्री भवभावेश्वर महादेव विराजमान है …. जिनकी आध्यात्म और योग में विशेष रुचि है उनके लिए श्रीमद राजचन्द्र आश्रम जो की ३२० ऐकर फैला हुआ है, विस्तृत जानकारी उन्ही की वेबसाइट से ले सकते है ईमेल आई डी डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दिया गया है ….
ॐ नमः शिवाय



